Thursday, June 8, 2017
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भारत में 65 से अधिक विभिन्न प्रकार के सरसों हैं. चित्र: CCAFS/Flickr.

पर्यावरण मंत्रालय जल्द ही जी. एम. सरसों को मंज़ूरी दे सकता है। मंत्रालय की जेनेटिक इंजीनियरिंग स्वीकृति समिति ने 11 मई 2017 को दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित जी. एम. सरसों के बीज, डी. एम. एच. 11, के व्यावसायिक उपयोग की सिफारिश की थी।

यदि पर्यावरण मंत्रालय इसे स्वकृति देता है तो डी. एम. एच. 11 भारत की पहली जेनेटिकली मॉडिफाइड (जी. एम) खाद्य फसल बन जाएगी। आलोचकों  का सबसे बड़ा आरोप है कि परीक्षणों से संबंधित वैज्ञानिक डेटा को अभी तक गुप्त रखा गया है। जी. एम. सरसों से जुड़े बायोसेफ्टी परिणामों को जनता के बीच लाना चाहिए। सरसों सत्याग्रह के प्रोफेसर राजिंदर चौधरी बताते हैं कि इस निर्णय के खिलाफ लड़ना महत्वपूर्ण क्यों है:

 

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